Articles | Kailash G. Saboo, Mumbai

Kailash G. Saboo

परिचय - राजस्थान की पुण्य और रणबांकुरों की माटी से जुड़े कैलाशकुमार साबू का जन्म राजस्थान के शेखावटी सीकर जिलांतर्गत बाबा परमानंद एवं सती सूरजकंवर की तपोभूमि मदनमहाराज की शक्ति भूमि लोसल ग्राम के माहेश्वरी परिवार गोविंदरामजी हीरालालजी के घर 18 अक्टूबर 1955 को हुआ। छात्र जीवन से ही लेखन में रूची के कारण हिंदी हाईस्कूल घाटकोपर, मुम्बई से निकलने वाली पत्रिका अर्चना में आपके कई लेख प्रकाशित हुए। 1972 से नवभारत टाइम्स, उसके पाश्चात जनसत्ता, मुम्बई की बातें, यशोभूमि, गागा टाइम्स, राजस्थान उद्धोष, थाने की आवाज, श्रीशक्ति संदेश, दीपक जगत, राज बंजारा, छम्मी संदेश, अनुपम मेल, वसई सत्ता, हेराल्ड, यंगलीडर, वीरों का गर्जना, सच का सामना वगैरह में अपनी पैनी लेखनी से सरकार व समाज का ध्यान आकर्षित करते आये। 1975 में श्रीरामलीला महोत्सव समिति घाटकोपर, मुम्बई, 1985 में राष्ट्रीय हिंदी पत्रलेखक संघ, 1994 में लोसल नागरिक मंडल, 1995 में राष्ट्रीय सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम नालासोपारा के जडेजा हॉल पर, 1996 में जनचेतना मंच मुम्बई ने पोद्दार बालिका विद्यालय फणसवाड़ी सभागृह में गोविंदराघो खैरनार के सानिद्ध में सम्मानित किया गये। सन् 1997 में वरिष्ठ पत्रकार, संपादक श्री शशिभूषण वाजपेयी के हाथों पत्रलेखक गौरव, 25 जनवरी 1998 को ताराबाई सभागृह मरीनलाईन्स में डॉ. राममनोहर त्रिपाठी के हाथों पत्रलेखक रत्न जनसत्ता की उपाधि से अलंकृत किये गये। सन् 1999 में थाने की अवाज ने पत्रलेखक गौरव पुरस्कार से विभूषित किया। सन् 2000 को हरिओम जनजागरण समिति, मुम्बई ने माणिकलाल कम्पाउंड स्टेट घाटकोपर में अपने रामायण ज्ञान यज्ञ में प्रमुख अतिथि के रूप में सम्मानित कर आपके कर-कमलों से उस दिन के कार्यक्रम का उद्धाटन करवाया। सन् 2001 में अनुपम साहित्य संगम ने काव्य गोष्ठी में, सन् 2002 में गागा टाईम्स ने, सन् 2003 में मुम्बई की बातें ने, सन् 2004 में स्वदेशी विचार गोष्ठी मंच पर नालासोपारा के एक सार्वजनिक समारोह में, सन् 2005 में वसई से प्रकाशित होनेवाले वसई सत्ता के संपादक देवेन्द्र खन्ना ने दलवी सभागृह में, सन् 2010 को नवी मुम्बई स्थित जलाराम मार्केट में काव्य गुलदस्ता द्वारा सम्मानित किया गया। घाटकोपर स्थित अग्रसेन भवन में नानीबाई के मायरा धार्मिक समारोह में अमृतवाणी संकिर्तन मण्डल ने सन् 2011 में आपको सरस्वती सम्मान से विभूषित किया। सन् 2012 में घाटकोपर स्थित कल्याण हॉल, परसीवाड़ी में श्रीरामलीला महोत्सव समिति ने, सन् 2014 में घाटकोपर स्थित सिंधुवाड़ी सोसायटी प्रांगण में मुख्य अतिथि के रूप में आपको सम्मानित किया गया। सन् 2015 में नवी मुम्बई स्थित कोपर खैरणे में अखिल भारतीय पत्रकार महासंघ ने अपने कविगोष्ठी में आपको आमंत्रित कर सम्मानित किया। साहित्य रत्न, पत्र-लेखक रत्न, पत्र-लेखक भूषण, पत्रलेखक गौरव, लोसल रत्न, बेबाक व बेधड़क स्वतंत्र पत्रकार आदि अलंकारों से समय-समय पर मुम्बई के मंचों पर अलंकृत किये जाते रहें है। पिछले 46 वर्षों में पत्रकारिता जगत से जुड़े सरस्वती पुत्र के रूप में यश कीर्ति को अर्जित करने वाले कैलाश कुमार घनश्याम साबू ने स्वतः सुखाय के लिये लेखन कार्य अपनाया है। जिसकी प्रेरणा उन्हें उनके स्वर्गवासी पिताश्री से मिली। आज भी मुम्बई से प्रकाशित होनेवाले प्रमुख अखबारों में समय-समय पर इनके सशक्त लेख प्रकाशित होते रहते हैं।


सर्जिकल स्ट्राईक के बाद एक ही विकल्प युद्ध – महायुद्ध

पहले पठानकोट, फिर काश्मीर के उरी स्थित सेना के बेस केंप पर किये गये आतंकी हमले में 18 सैनिकों को मार गिराया। तब देश के हर कोने से अवाज उठी की आतंकवादीयों को मुँह तोड जवाब देने का समय अब आ गया है। तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री मनोहर परिकर, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा विशेषज्ञ अजीत डोभाल तथा तीनों सेना के प्रमुख आदि ने वार रूम (रक्षा गुप्त प्रणाली) में बैठकर रणनीति बनाई जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार 29 सितंबर 2016 को हमारी सेना ने एल.ओ.सी. पार कर सर्जिकल स्ट्राईक की जिसमें पच्चासों पाकिस्तानी खुँखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया और बिना क्षति के हमारी भारतीय सेना सीमा में लौट आई लेकिन पापी पाक विषैला नाग है, बदला लेने के लिए घात लगाकर आज भी भारतीय सैनिकों पर आक्रमण कर रहा है।
सर्जिकल स्ट्राईक के पाश्चात पूरा देश एक किस्म के गौरव ओर मनोबल से भर गया। औसत हर भारतीय को यह सोंचकर बड़ा सकून मिला कि अब वह मात्र चोट खानेवाला नहीं बल्कि चोट पहुँचाकर बड़ी क्षति करने में भी सक्षम है। परंतु दुःख कि बात है कि आज हमारे देश के कई बड़े नेता को यह अभियान फर्जी दिखा तथा मोदी सरकार से प्रमाण माँगा। ऐसे नेताओं के बयान के कारण शत्रुओं एवं देशद्रोही तत्वों का मनोबल बढ़ता है। सेना की कारवाही को ही ऐसे नेताओं ने कठघरे में खड़ा कर दिया। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि देश बडा या व्यक्ति। वास्तव में व्यक्ति के अंदर जो भी योग्यताऐं है वह सभी देश की ही देन है। भारत ही नहीं दुनिया में भी, कोई भी व्यक्ति अपने देश से बड़ा नहीं होता है। पापी पाक के कलाकारों ने भारत से वापस जाने के पाश्चात अपने देश को प्रधानता दी और देनी भी चाहिये।
लेकिन इसके विपरीत हमारे देश में क्या हो रहा है। कला और खेल के नाम पर देश को भूलने की भूल कर रहे है। जबकि भारतीय कलाकारों, खिलाडियों को यहाँ तक कि प्रत्येक जनमानस को भी अपने देश के बारे में ही सबसे पहले सोंचना चाहिए। देश की सुरक्षा के नाम पर सारा देश एक दिखाई देना चाहिए। नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राईक से भारतीय सेना ने जनमानस को लंबे समय बाद मुस्कुराने का मौका तो दिया है लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नहीं समझा जाये कि पाक प्रायोजित आतंकवाद इससे समाप्त हो जायेगा। अब वो नये-नये पैंतरे इस्तेमाल करेगा। हमें सतर्कता के साथ पापी पाक को पाक की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। वैसे तो नोटबंदी के कारण आतंकवादियों एवं उनके आकाओं की कमर ही टूट गई है। फिर भी अब समय आ गया है पाक को तथा आतंकवाद को ठिकाने लगा कर उसका समूल नाश किया जाये। इसका एक मात्र विकल्प है युद्ध-महायुद्ध। क्योकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


पांच सौ तथा हजार के नोटों को बंद होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये संजीवनी का काम करेगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के कारीगिरों, व्यापारियों तथा अन्य सभी वर्गों से मन की बात में तथा अन्य मार्ग से सभी देशवासियों को चेतावनी दिया था कि 30 सितबंर 2016 तक अपने सभी अवैध सम्पति पर 45 प्रतिशत का टैक्स चुकाकर वैध कर ले, नहीं तो भारत सरकार की ओर से कठोर कदम उठाया जायेगा। लेकिन बहुत से व्यापारी, नेता, अधिकारी, हवाला कारोबारी आदि ने इसको नजरअंदाज कर दिया। वे इसी गलतफहमी में रहे कि जिस तरह पिछली भी सरकार ने इस पर कोई सक्त कदम नहीं उठाया, उसी तरह यह सरकार भी कोई ठोस कदम नहीं उठा सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंन्द्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को रात्री 8 बजे देश में प्रचलित सभी एक हजार तथा पाँच सौ रूपये के सभी नोट को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा कर दी। उनके इस साहसिक कदम से जहाँ सफेद कारोबार करने वाले सभी देशवासियों में हर्ष की लहर दौड़ गयी वहीं काले धन पर कारोबार करने वालों में मातम छा गयी।
देश हित में उठाया गया यह बेहद ही सराहनीय है। यह साहसिक कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये संजीवनी का काम करेगी तथा अगामी छः माह में इसके सुखद परिणाम भी दिखने लगेगा। पडोसी देश पाकिस्तान द्वारा जाली नोट छापकर विभिन्न मार्गों से भारत में भेजकर भारतीय अर्थव्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखली कर रहा था, उस पर भी रोक लग जायेगी। साथ ही जाली नोटों के माध्यम से देश के अंदर पाँव पसारे आतंकवादी गतिविधियाँ, तस्करी, नशाखोरी पर भी इस साहसी कदम से लगाम लग जायेगी। मोदीजी के इस कदम से दाउद व आई.एस.आई. द्वारा नकली नोट के बल पर फैलाया जा रहे आतंकवादी गतिविधियों को एक ही झटके में कमर तोड़ कर रख दिया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा हजार व पांच सौ रूपये के नोटबंदी के साहसिक कदम की जितनी भी सराहना की जाये कम है, परन्तु उसमें कई खामिया भी रह गई है। जैसे बिना पर्याप्त तैयारी किये यह कदम उठया गया जिससे देश भर में अफरा-तफरी मच गई। वहीं दो हजार की नोट का शुभारंभ कही-न-कहीं कालेधन को बढ़ावा देने में सहायक बन सकता है। यह कदम कालेधन को खत्म करने की दिशा में आत्मधाती कदम हो सकता है। सरकार को दो हजार के नये नोट के चलन में लाने के बजाये सौ-पच्चास की नोट का पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराना चाहिये था।
केन्द्र सरकार को मेरा सुझाव है कि कालेधन को पुरी तरह से समाप्त करने के लिये सभी राजनैतिक पार्टी व राजनेताओं की सारी सम्पति को राष्ट्रीय सम्पति घोषित कर दिया जाये। क्योंकि देश मे भष्ट्राचार की गंगोत्री यहीं से निकलती है। साथ ही उन सभी कम्पनी के सी.ई.ओ. तथा डायरेक्टरों की सम्पति जप्त किया जाये जिन्होंने बैंक से कम्पनी के नाम पर भारी-भरकम लोन लेकर कम्पनी को रातों-रात डूबोकर माला-माल बन गये। कई मल्टीनेशनल कम्पनी जनता के गाढ़ी कमायी के पैसे को लोन के रूप में लेकर भारी मुनाफा कमा रहे है। जब कम्पनी में लगा पैसा लोन के रूप में जनता का है, तो कम्पनी को हुये मुनाफे में जनता की भागीदारी क्यों न हो? कम्पनी में जितना प्रतिशत धन लोन के रूप में है, उतना मुनाफा भी सरकारी खजाने में जमा किया जाये।
नये जी.एस.टी. बिल के माध्यम से पुरे देश में एक समान कर प्रणाली लागू किया जा रहा है, उसी तरह देश भर में सभी सरकारी व प्राइवेट कम्पनियों में एक समान काम करनेवाले सभी कर्मचारियों को भी एक समान वेतन व भत्ता दिया जाये। इससे सभी लोगों का जीवन स्तर समान रूप में विकसीत होगा। इससे सामाज में समानता का विकास होगा।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


मोदी सरकार का तीसरा बजट

देश का आम बजट 2016-17 पेश हो चुका है। यह बजट गाँवों, किसानों, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लायेगा। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सरकार के बजट में जितना स्थान कृषि को मिलना चाहिए था, उतना स्थान सम्भवतः पिछले 65 वर्षों में प्रथम बार ही मोदी सरकार के तीसरे बजट में देखने को मिला है, जो काबिले तारीफ है। इस देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जानेवाले कृषि कार्य व कृष्कों की अवहेलना हम सतत देखते रहे है। देश की पिछली पूर्ववर्ती सरकारों का कृषि विमुख स्वाभाव ही रहा है। कृषि के संदर्भ में प्रभावी व फलदायी नीतियों का निर्माण नहीं हो पाया। कृषि कार्य की जोखिम से बचने का जो सबसे आकर्षक व प्रभावी उपाय कृषि बीमा है। उसे पिछले कई दशकों में उपेक्षित रखा गया। कृषि बीमा का ढ़ाचा कुछ इस प्रकार का था कि किसानों से अधिक बीमा कम्पनियाँ लाभ कमाती थी, जिससे किसानों को आत्महत्या के लिये मजबूर होना पडता था। परंतु नरेन्द्र मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना में प्रीमियम की राशि आश्चर्यजनक ढ़ंग से घटाकर डेढ़ से ढ़ाई प्रतिशत के निम्न स्तर पर ले आये तथा बीमा के नियमों का सरलीकरण कर दिया जो किसानों के हित में है। मोदी सरकार सभी राज्य के किसानों को सही समय पर उर्वरक उपलब्ध करवा रही है। जबकि इससे पूर्व राज्य सरकारों को पत्र लिख कर केन्द्र की जी-हजुरी करनी पडती थी। किसी भी देश की विकास का मूलमंत्र होता है परिवहन और संचार। इस बार दूरस्थ गाँवों तक इन सेवाओं के विस्तार के लिये पर्याप्त बजट की व्यवस्था की गई है। यदि बजट में प्रवधानिक धनराशि का एक-एक पैसा गाँवों तक पहूँचता है तो गाँवों के विकास के साथ-साथ खेती से जुड़े लोगों का स्तर भी ऊँचा उठेगा, यह सुनिश्चित है। यह भी अच्छी बात है कि वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बजट का घाटा कम करने की राह पर डटे रहकर ऐसा बजट प्रस्तुत किया जो नौकरियाँ पैदा करने के साथ सर्वसमावेशी आर्थिक वृद्धि पर केंद्रीत है। बजट में रोजगार पर इस तरह ध्यान दिया है कि मध्य, छोटे और लघु उद्योगों के लिये प्रोत्साहन, कौशल, विकास और करों की निम्न दरों का फायदा दिया है। इन सबसे भारत को काफी मजबूत जमीन पर अगली छलांग लगाने में मदद मिलेगी। रूरल सेक्टर को खुश करने के कदम लंबी अवधी में इकॉनोमी को मजबूती प्रदान करेगी तथा बैंके भी सही राह पर होंगी। कॉरपोरेट जगत के बायलेंस शीट भी सही हो जायेगी। यह पूरा बजट गाँव और गरीब के करीब है। सूट-बूट पर घिरनेवाली सरकार ने सबकी बोलती बंद कर दी है। नरेन्द्र मोदी सरकार का तीसरा बजट अच्छे इरादों से भरपूर है। सरकार ने बजट में इस बार सही बटन कान खटका दबाया है।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


राष्ट्र को खंड-खंड करनेवाली जैसी अभिव्यक्ति की आजादी किसी को नहीं दी जा सकती

हैदराबाद विश्वविद्यालय में याकूब मेनन को महानायक बनाया गया था। तब छात्रों के आपसी रंजीश के चलते रोहित वेमुला एंगल की हत्या हुई। जे.एन.यू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली) परिसर में छात्रों के एक गुट ने अफजल गुरू को महानायक बनाया और राष्ट्र विरोधी उन्माद करनेवाले नारे लगाये। राष्ट्र के खिलाफ हिंसा के लिये उकसाने वाले वे नारे थे, भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, अफजल हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल जिंदा है, अब हर घर में अफजल पैदा होगें, भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े करेंगे। असहमती नही बल्कि देश और देशवासियों के विरूद्ध युद्ध का खुला आह्वान था जिस पर सरकार ने तुरंत कारवाई की और कन्हैया आदि जैसे छात्र जो जहरीले नागों की तरह देश को दंश मार रहे थे, को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन जे.एन.यू. में छात्रों के साथ हमदर्दी जताने के लिये राजनेताओं की लंबी कतार लग गई जिनमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी, वामपंथी विचारधारा के कामरेड सीताराम याचुरी आदि सम्मलित थे जो देश के लिये घातक है। जब देश में विपक्ष को राष्ट्रहित के लिये इक्कठा होना चाहिये। तब कुछेक नेता यदि देश-विरोधियों और देशद्रोहियों का सथ देगे तो इसे सही कर्तव्य पारायणता नहीं कहा जायेगा। किसी भी सूरत में देश की सांसद के हमलावरों के गुणगाण को और देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगानेवालों को बक्शा नही जाना चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देशविरोधी विकृत विचारधारा को बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी शिक्षण संस्थान का मूल कार्य नैतिक, देशभक्ति एवं उच्चकोटी की गुणवतता वाली शिक्षा ही देना होता है। उसमें किसी आतंकवादी के समर्थन में नारे लगाना और देश के टुकड़े करने की ललकार यह साबित करने के लिये काफी है कि अमुक संस्थान अपने मूल लक्ष्य से भटक चुका है।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


टी.वी. सीरीयल महाराणा प्रताप का

सोनी टी.वी. चैनल पर रात दस बजे प्रसारित होनेवाले सीरियल भारत का वीरपुत्र महाराणा प्रताप को आनन-फानन में शर्टकट करके एकाएक बंद कर दिया गया जिससे कई देशवासियों के दिल को ठेस पहूँची है। हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप ने मुगल सेना के छक्के छुड़वा दिये थे। मानसिंह, सलीम अकबर आदि को मैदान छोड कर आगरा भागना पड़ा था। (उदयपुर के जगदीश मंदिर के शिलालेख से पता चलता है कि हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई थी।) तब अकबर ने प्रण किया कि अब मैं मेवाड़ की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखूँगा। महाराणा प्रताप, उसकी भील व राजपूत सेना ने हल्दी घाटी युद्ध तो जीत लिया। लेकिन युद्ध में राज्य के जन-धन की अपार क्षति हुई थी। उसकी क्षतिपुर्ति करने के लिये भामाशाह जैसे दानवीर, स्वाभिमानी देशभक्त ने अपने घर का पुरा खजाना महाराणा प्रताप के चरणों में अर्पित करके राष्ट्रभक्ति का ज्वलंत प्रमाण जनता जनार्दन को दिया वह बेमिशाल है। उसके पाश्चात युद्ध में जो विनाश हुआ था उसे ठीक करके राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया। अपने कुशल संगठन से राज्य को बलशाली एवं आत्मनिर्भर बनाया। शुरवीर, महाबली महाराणा प्रताप स्वाभिमानी, स्वतंत्रता का पुजारी, रणकुशल, स्वार्थ त्यागी, नीतिज्ञ, दृढ़प्रतिज्ञा और कवि था। हल्दी घाटी युद्ध की जीत के पाश्चात महाराणा प्रताप ने 20 वर्षों तक सफलता से अपने राज्य का नेतृत्व किया। उसके राज्य से शत्रु हमेशा भयातुर बना रहा। 19 जनवरी 1597 में अंतडियों में अधिक खिचाव होने से दर्द की पीडा बढ़ती गई। तबीयत ठीक होने की दवा ने भी काम करना बंद कर दिया। उस रण-बाँकुरे स्वतंत्रता के पुजारी प्रताप ने उस दिन संतोष पूर्वक अपने नेत्र बंद किये। स्वर्ग सिधारने के पहिले जनता जनार्दन को देशभक्ति एवं उज्जवल चरित्र के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। अगर सोनी टी.वी. चैनल उपरोक्त जीवनी को भी दर्शकों को दिखाते तो हम भारतीयों को एक प्रेरणा प्रदान होती।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


बिहार चुनाव के बाद कहाँ लुप्त हो गये असहिष्णुवादी

पूरा संसार जानता है कि हम अतिथिओं का आदर करने वाले लोग हैं। हमारे यहाँ न जाने कितने संप्रदाय तथा मान्यताएँ है। हमसे अधिक और कौन उदार होगा जो साँप को भी दूध पिलाता है। हम भारतीय अतिथियों को भगवान मानते है। वृक्ष को परमात्मा कहते है। हमारे यहाँ तो जल, वायु, अग्नि में भी नारायण का वास है। हमसे अधिक सहिष्णु कौन हो सकता है, जिन्हें भारत और भारतीयता अनुभूति नहीं हुई वे (टोलीरेन्स) असहिष्णुता की चर्चा कर रहे है। मणिशंकर अय्यर, दिगविजय सिंह, शकील अहमद, सलमान खुर्शिद, आजम खान, आमीर खान, शाहरूख खान तथा कई लेखक, रचनाकार, साहित्यकारों ने पुरस्कार लौटाकर भारत में असहिष्णुता के माहौल का जो शोर शराबा मचाया था उसका उदेश्य कुछ और ही था। नरेन्द्र मोदी सरकार विश्व में भारत की जो साख बढ़ा रहे हैं, प्रतिष्ठा बढ़ा रहे है, भारत का नाम रोशन कर रहें हैं।
पुरस्कार लौटाने वाले, बुद्धिजीवी तथा कांग्रेसी नेता उससे चिंतित थे कि जो 60 सालों के प्रयास से नहीं हो सका वह अचानक डेढ़-दो वर्षों के दरम्यान इतनी तीव्र गति से कैसे संभव हो रहा है। पिछले कुछ महिनों में नरेन्द्र मोदी द्रोह से वशीभूत लोगों ने विश्व में भारत की छवि बिगाडने के लिये जो कुछ किया है, उसके कुछ परिणाम हुये भी है लेकिन पेरिस की घटना, पठानकोट की घटना ने दुनिया की आँखे खोल दी है और दुनिया आतंकवाद के मामले में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजरिये पर एकजुट होती जा रही है। लेखक, रचनाकारों, कलाकारों और निहित स्वार्थ की राजनीति करनेवालों ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जिस काल्पनिक असहिष्णुता के अभियान द्वारा उनके संकल्प सबका साथ, सबका विकास का मार्ग अवरूद्ध करने का बिहार चुनाव में जो काम किया है वह निंदनीय है। अब आम आदमी असहिष्णुता के अभियान का निहितार्थ समझने लगा है। क्यों कि बिहार चुनाव के बाद सभी असहिष्णुतावादी लुप्त हो गये।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


मोदी सरकार का पहला बजट तथा जनता की उम्मीद

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार का पहला बजट संतुलित टैक्स मुहिम का ब्लूप्रिंट हैं। इससे आर्थिक विकास में मदद मिलेगी। निवेश को मजबूती मिलेगी और बुनियादी ढ़ाचे पर जोर बढ़ेगा जिससे देश विकासोन्मुख की ओर अग्रसर होगा। काले धन के मुद्दे पर सरकार ने सख्त रूख अपनाया है। इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी। इस बजट में गरीब, मध्यम और सम्पन्न वर्ग के लिये कुछ न कुछ है। पहली बार मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है जिससे भारतीय सेना की दुनिया में साख बढ़ी है। यह वाकई सराहनीय कदम है। यह बजट राजकोषीय घाटे को कम करने की ओर अग्रसर होगा। राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लायेगा। कुल मिलाकर यह सकारात्मक बजट है। फिर भी नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से जनता को काफी उम्मीद है। वह ऐसे असरदार कानून चाहते हैं जिनके परिणाम तुरंत दिखे, लेकिन सरकार की मजबूरी यह है कि वह लोकसभा में तो मजबूत है लेकिन राज्यसभा में बहुत कमजोर दिखाई दे रही है। इस कारण विपक्ष मोदी सरकार के विकास के अजेंड़ो के बिल पास नहीं होने दे रहा है। उसे मजबूरी में अब तक आठ अध्यादेश लाने पड़े है। हलांकि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहनेवाली है। अगले कुछ वर्षों में राज्यसभा में भी भारतीय जनता पार्टी मजबूत हो जायेगी, लेकिन तब तक विपक्षी दल मोदी सरकार के नाक में दम करते रहेंगे।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)



पापी पाकिस्तान को अब मिसाईलों से ही समझाना होगा।

आखिर पापी पाकिस्तान के साथ हम कब तक बातचीत करते रहेंगे? जब-जब सार्थक बातचीत का प्रयास भारत की ओर से किया जाता रहा है, तब-तब सीमा पर पाक द्वारा फायरिंग होने लगती है और भारतीय सीमावर्ती इलाकों में आतंक और उत्पाद मचाना पाकिस्तानी पापी सेना की आदत सी बन गई है। अब तो 40 वर्षों में उसकी नापाक हरकतों की गिनती रख पाना भी मुश्किल हो गया है। पिछले सिर्फ एक साल (2014) में पापी पाक 555 बार सीजफायर कर चुका है। बार-बार सीजफायर का उल्लंधन करते हुए वर्तमान में जम्मू-काश्मीर के हीरा नगर तथा सांभा सेक्टर में भीषण गोला बारी कर वहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में भय और दहशत का वातावरण बनाते जा रहा है। पापी पाकिस्तान हिंसक पशु से भी बदतर है, उसके साथ अब मानवीय व्यवहार नहीं करना चाहिये। ईंट का जवाब पत्थर से ही देना चाहिए। भारत-पाक संबधों पर हमेशा से पापी पाक सेना और अतिवादी नेताओँ की हठधर्मिता भारी पड़ती है। जब-जब दोनों देशो के राजनीतिज्ञ मुखियाजनों ने रिश्ते सुधारने के लिये पहल की तब-तब कट्टरपंथी ताकतें, माफिया, आई.एस.आई.एस. एवं अन्य आतंकवादी संगठनों आदि ने ऐसे होने नहीं दिया, जिससे दोनों देशों के सीमावर्ती इलाको का विकास नहीं हो पाया। पापी पाक के मंसुबे ठीक नहीं है। वह आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है। वह प्रेम भाईचारा की भाषा नही समझता। अब समय आ गया है, पापी पाकिस्तान को गोला, बारूद एवं मिसाइलों से ही समझाना होगा।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


कांग्रेस मुक्ति के बाद का भारत

विपक्ष लोकसभा चलने नहीं दे रहा है। विकास कार्य से ध्यान बटाकर बेकार फालतू के मुद्दे उठाकर देशवासियों का गुमराह कर रहें है। राज्य सभा में कांग्रेस गठबंधन बिल पास नहीं होने दे रहा है। फिर भी कांग्रेस मुक्ति के बाद भारत के 7 माहिने के अवलोकन करते है, तब पता चलता है कि मोदी सरकार से देशवासियों को क्या उपलब्धियाँ हुई।
• कांग्रेस का विलेन नरेन्द्र मोदी भारत का सुपर हीरो बनकर प्रधानमंत्री के सिंहासन पर आरूढ़ हुये।
• भारत में स्वच्छता अभियान आरंभ किया जिसमें देश के बड़े-बड़े दिग्गज जुड़े।
• काला बाजारियों का पता लगाने के लिये एस.आई.टी. का गठन हुआ।
• भारतीय योग को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दिलवाते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दिलवाया।
• भारत में प्रधानमंत्री जन-धन योजना लागू हुई। जिन गरीब लोगों का बैंकों में खाता नही खुलता था उनका खाता खुला।
• भारत का डंका विदेशों में बजा, चमका और रोशन हुआ।
• इंटरनेशनल मार्केट में भारत का रुपया मजबूत हुआ।
• मार्केट पर कंट्रोल हुआ, किमतों में स्थिरता आई।
• डीजल-पेट्रोल के दाम घटे।
• चाँदी-सोना खरीदना सस्ता हुआ।
• दुर्गम पहाडियों पर स्थित वैष्णव देवी मंदिर जाने के लिये कटरा रेलवे स्टेशन तक रेल सेवा शुरू हुई।
• आंध्रा के श्रीहरि कोटा परमाणु संयत्र से भारतीय स्वनिर्मित मंगलयान को सफलता पूर्वक मंगल की कक्षा में भेजा गया।
• 43 देशों के लिये विजा ऑनलाईन अराईवल जारी हुआ।
• विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला।
• फाँसी की सजा पाये पाँच भारतीय मछुवारों को श्रीलंका ने रिहा किया। कुटनीतिक मोर्चा पर मोदी सरकार की जीत है।
• चीन सीमा पर हो रही गड़बड़ गतिविधियों को कड़ाई से रोका गया। चीन ने अपना नया रस्ता भारतीय तीर्थयात्रियों को मानसरोवर जाने के लिये खोला।
• भारत सरकार के दबाव के कारण आतंकवादी मास्टर मांईड जकी-उर-रहमान लकवी को पाकिस्तान सरकार ने फिर से गिरफ्तार कर जेल भेजा।
• नोएडा सेक्टर में आतंकवादी नराधाम रक्तुला को गिरफ्तार किया।
• प्रवासी भारतीयों को अब मत डालने के लिये भारत नहीं आना पड़ेगा। उन्हें ई-वोटींग का अधिकार मिला।
• पाकिस्तान द्वारा जम्मू-काश्मीर में फायरिंग की जा रही थी, उसका मुँहतोड़ जवाब दिया गया। भारतीय फौज ने पापी पाक के करीबन सत्तर के उपर बंकरों को नष्ट किया।
• भारतीय सैनिकों ने पोरबंदर के पास समुद्र में पाकिस्तानी आतंकवादी नाव को चारो तरफ से घेरा, नाव में बलास्ट हुआ। आतंकवादी सहित विस्फोटक समाग्री जलकर राख हुई।
• रेल में महिलाओं की सुरक्षा के लिये महिलाओँ की सुरक्षा के लिये महिला बटालियन बनी।
• शंगु विध्वसंक पोत (आई.एन.एस. कोलकत्ता) को भारतीय नौ सेना को समर्पित किया।
• खुनी आतंकवादी, अलवगाववादी मतान्तर से राष्ट्रान्तर करनेवाले संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक ऑफ बोडोलैण्ड (सौंगविजित) को समूल नष्ट करने के लिये तुरंत सेना की बटालियने भेजी गई।
• यमूना एक्सप्रेस वे एवं ग्रेटर नोएडा समेत तीन अथोरिटी के चीफ इंजिनियर यादव सिंह के घर से सौ करोड़ के जेवर, कार के साथ दस करोड़ की नगदी बरामदी किया गया।
• पाकिस्तान ने 40 भारतीय कैदियों को रिहा किया। भारत ने कूटनीति जीत हासिल की।
• सहारा के महत्वपूर्ण दस्तावेज पकड़े गये, साथ ही 125 करोड़ रुपये नगद तथा भारी मात्रा में सोना (काला धन) जब्त किया।
• देश की पहली सेमी हाई स्पीड (180 किमी. प्रति घंटा) रफ्तार से दौड़ने वाली गतिमान एक्सप्रेस ट्रेन दिल्ली से आगरा कैंट के लिये चली।
• 50 लाख अवैध भारतीय अप्रवासियों को अमेरिका ओबामा सरकार ने वैध का दर्जा दिया।
• घरों की ई.एम.आई. सस्ती हुई। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपोरेट (नीतिगत) ब्याज दर में कटौती की।
• प. बंगाल के एक घर में विस्फोटक सामग्री बनाने की आतंकवादी फेक्ट्री पकड़कर उससे जुड़े तारों के पकड़ा।
• वीरभूमि से 150 देशी बम बरामद कर अनहोनी घटना को टाल कर प्रजा की रक्षा की।
• दक्षिण काश्मीर में शोपिया जिले में पाँच खूँखार अत्याचारी आतंकवादी मार गिराये।
• आई.आई.टी. की शिक्षा ऑनलाईन हुई।
• अत्याधिक तकनिक से लैस सुखोई 30 विमान वायुसेना के सुपुर्द किया।
• उदयपुर-चितौड़गढ़ रेलमार्ग पर कपासन रेलवे स्टेशन के प्लेटफर्म की लम्बाई 162 मी. बढ़ाई गई।
• बदरीनाथ एवं केदारनाथ धाम जानेवाले राजमार्ग के विकास का काम जोरों से चालु है।
• भीषण बाढ़ से तबाह हो गये काश्मीर को तुरंत राहत समाग्री व सेना की मदद भेजी गई जिसके कारण मोदी सरकार की बहुत तारीफ हुई।
• डोकोमेंट एटेस्टेट बंदकर दिया गया। आम जनता को राहत मिली।
• देश का पहला हल्का लडाकू विमान तेजस विमान भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
• ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस में रेलवे पुलिस व अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने भुसावल स्टेशन पर 2 करोड़ 8 लाख के रुपये का 8 किलो सोना पकड़ा।
• भारतीय इतिहास में पहली बार अमेरिकी व्हाईट हाउस ने भारत के लिये दोस्ती का घोषणापत्र जारी किया।
• नारी शक्ति को बढ़ावा देते हुए पहली बार गणतंत्र दिवस परेड़ में राजपथ पर तीनों सेना की महिला सैनिकों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
• विश्व के 35 देशों ने भारतीय कबड़ी खेल को आरंभ किया।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


कांग्रेस का विलन भारत की जनता का हीरो बना

भारत देश के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित करनेवाले माननीय श्री नरेन्द्र मोदी पर चुनाव के समय दंगों के नाम पर विरोधियों द्वारा कई तरह के लांछन (आरोप) लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई। जरा एक नजर (बानगी) देखिये –
• आमतौर पर चुप रहनेवाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी पर कई तरह के शब्दभेदी बाणों की बाछोर कर अपनी खीज उतारी
• काग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को झूठों का सरदार कहा।
• राहुलगांधी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी जहर की खेती करते है।
• प्रियंका वाड्रा ने मोदी को नीच सोंच का व्यक्ति बतलाया।
• अजीत सिंह ने कहा मोदी को समंदर में फेक देना चाहिए।
• सलमान खुर्शीद ने कहा मोदी नपुंसक है। एक जानवर हैं।
• कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद ने कहा कि हम मोदी को ठोंक कर जबाब देंगें और उनकी बोटी-बोटी कर देंगे।
• पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा मोदी प्रधानमंत्री बन गये तो देश जल उठेगा। वे दंगा बाबू है।
• बासपा प्रमुख मायावती ने कहा मोदी आयेंगे तो देश साम्प्रदायिक दंगे फैल जायेगा।
• राकपा प्रमुख शरद पवार ने कहा नरेद्रभाई को मनोरोग अस्पताल में उपचार कराना चाहिए।
• मुलायम सिंह यादव ने कहा मोदी के हाथ खून से रंगे है। उनमें इंसानियत नहीं हैं। वे अत्याचारी है।
• समाजवादी पार्टी के एक नेता द्वारा यह कहना कि एक चाय बेचनेवाला कभी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता।
• उत्तरप्रदेश के वरीष्ठ केबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी ने मोदी की तुलना रावण से की।
• भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने नरेन्द्र मोदी को तानाशाह तथा देश का सबसे बड़ा गुंड़ा कहा।
• राकपा के विजय आंबले ने नरेन्द्र मोदी को पागल करार दिया।
• इस्लामी संगठन सिमी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जान से मारने की धमकी दी है।

इसके अतिरिक्त किसी ने नरेन्द्र मोदी को राक्षस कहा, किसी ने नरभक्षी, किसी ने शैतान, किसी ने फेंकू, किसी ने कुत्ते का बड़ा भाई तो किसी ने विभाजनकारी कहा। कांग्रेस एडं पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को विलेन बना रखा था। परंतु जनता जनार्दन ने जात-पात की गंदी राजनीति करनेवालों को इस लोकसभा चुनाव में धुल चटाकर अच्छा सबक सिखाया है। आज जनता ने नरेन्द्र मोदी को प्रदानमंत्री बनाकर देश का हीरो बना दिया है।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)


नरेन्द्र मोदी विरोधियों को डर सता रहा है

जब भी कांग्रेस पार्टी मौका पाती है, तो नरेन्द्र मोदी को दंगे के नाम पर बदनाम करने लगती है। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कई तरह के शब्दभेदी बाणों की बौछार कर मोदी के नाम पर अपनी पूरी खीज उतारी और तरह-तरह की बातें की, उससे लगता है कि वे पूर्वाग्रह से ग्रसित है। उसी तरह समाजवादी पार्टी के एक नेता द्वारा नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाकर यह कहना कि “एक चाय बेचनेवाला कभी देश का नेतृत्व नहीं कर सकता व प्रधानमंत्री नही बन सकता”, तो उन महाशय को यह जानकारी होनी चाहिए कि जितने भी बड़े कार्य विश्व में हुय़े है वे सभी साधारण लोगों ने ही किये है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी ने नरेन्द्र मोदी की रावण से तुलना कर दी। इसी के कुछ दिनों पूर्व मुलायम सिंह यादव ने उनके बारे में कहा था कि “मोदी के हाथ खून से रंगे है। एक ऐसा शक्स जो अत्याचारी है, जिसमें इंसानियत नहीं है।” उन महाशय को यह जानकारी नही हैं कि 1992 में राममंदिर आंदोलनकारियों पर जो निहत्थे थे, उन कार सेवकों पर किसने गोलीयों कि बौछारे करवाई? लाशों को बोरों में भर कर किसने सरयू नदी में फिंकवाया? आज देश में नरेन्द्र मोदी विरोधियों को डर सता रहा है। ये विरोधी देश में बढ़ती बेरोजगारी, भष्ट्राचार, घोटाले, सुरसा की तरह बढ़ती महंगाई, देश में विदेशी जिन्सों की भरमार, रोज होने वाले बालात्कार, काला धन, खून-हत्याओं आदि पर मुँह बंद रखे रहते है। ये वो लोग है जो गरीब, असहाय व समाज के निचले तबके के लोगों को न तो समाज में और नही ही राजनीति के क्षेत्र में उच्च पदों पर देखना चाहते है। ये वे लोग है जो देखना चाहते है सिर्फ व सिर्फ नेहरू-इंदिरा खानदान को या उनकी कठपुतलियों को।

- कैलाशकुमार धनश्याम साबू (वरिष्ठ पत्रलेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार)