Rajkumari Dhoot

Smt. Rajkumari Ji Dhoot (President, Shri Jugalbihari Parikar)

Rajkumari Dhoot

परिचय – भक्ति के कई मार्ग है, लेकिन सबसे कठिन मार्ग है गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भगवत चेतना को जगाए रखना। और शायद इससे भी कठिन है, भगवत चेतना का प्रकाश को फैलाना। श्रीमती राजकुमारी जी धूत, जिन्हें लोग प्रेम से “बाई जी” कहते है, उस व्यक्तित्व का नाम है, जिन्होंने गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भगवत चेतना का प्रकाश को फैलाने का बीड़ा उठाया है। वैभव जनित अंहकार से कोसों दूर, मृदुभाषी, सौम्य और भक्तियोग की इस “प्रेम प्यासी” के जीवन की पुस्तक का हर पन्ना एक ग्रंथ है। अध्यात्म में रूची रखने वाली श्रीमती राजकुमारी जी धूत व उनका पुरा परिवार संत समागम और धार्मिक कार्यक्रमों की आज एक अभिन्न अंग बन चुका है।

जन्म – श्रीमती राजकुमारी जी धूत सुप्रसिद्ध उद्योगपति स्व. श्रीकृष्ण जी सोमानी की वरिष्ठ पुत्री हैं। आपका जन्म 23 जुलाई 1944 में मुम्बई में हुआ। आपके दादाजी श्री हजारीमल जी सोमानी एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे। धार्मिक संस्कार और भक्ति भावना आपको उनसे ही विरासत में मिली। चार भाईयों में कनिष्ट आपके पिताजी श्री श्रीकृष्णजी सोमानी एक आकर्षक व्यक्तित्व, तीक्ष्ण बुद्धि, समाजिक कार्यों में अभिरूची रखने वाले धर्मनिष्ठ तथा सुप्रसिद्ध उधोगपति थे।

शिक्षा - जिस समय बमुश्किल किसी लड़की को पढ़ाया जाता था, उस जमाने में राजकुमारी जी अपने परिवार में स्नातक की उपाधी लेने वाली पहली महिला बनी।

विवाह - 16 वर्ष की आयु में राजकुमारी जी की शादी गंगापुर (औरंगाबाद) के एक बड़े जमीनदार और औधोगिक धूत घराने में हुई। आपके पति श्री रामनिवासजी धूत अत्यंत ही सुलझे विचारों वाले और कृष्ण भक्त हैं। धर्म एवं आध्यात्म से जुड़े आपके हर कार्य में आपके पतिदेव का पूर्ण सहयोग रहा है।

आध्यात्मिक बीज का अंकुरण – राजकुमारी जी के मन में बचपन से ही भक्ति के बीज अंकुरित हो गए थे। विवाह के बाद भी उन्हें ऐसा परिवार मिला जहां का माहौल भक्तिमय था। धूत परिवार का मुख्य अंग बनने के बाद बाई जी ने अपने मुम्बई स्थित निवास स्थान में ही ठाकुर श्री जुगल बिहारी जी का एक मनोरम मंदिर बनाया, जहाँ उनकी अष्टयाम सेवा वृन्दावनीय पद्धति से हो रही है। बाई जी को जानने वाले लोग इस मंदिर को छोटा वृंदावन भी कहते है। इस मंदिर में पिछले 25 वर्षों से श्री जुगल बिहारी परिकर से जुड़ी महिलाएं हर माह के पहले बुधवार को सत्संग का आनंद और बाई जी के प्रेरणात्मक बातों का अनुभव लेती है।

अध्यात्म का ज्ञान - श्री रामसुखदास जी महाराज, मोरारी बापू और श्री डोंगरे जी महाराज जैसे संतों के सानिध्य में रहते हुए राजकुमारी जी को अध्यात्म का ज्ञान हुआ। परम पूज्य स्वामी रामसुखदासजी महाराज को आप सदगुरू के रूप में मानती है। बचपन से ही आप पू. स्वामीजी महाराज के सत्संग में लगी हुई थी। श्रीमद्भागवतगीता रूपी अध्यात्म का पहला बीज आपको परम पू. स्वामीजी से ही मिला। उन्होंने आपको “प्रेम मार्ग की पथिक” कहा। सुत्रात्मक स्वामी शरणानंदजी से प्रभावित हुई। ओशो से भी प्रभावित हैं लेकिन मूल भूख वृन्दावनीय रसोपासना से ही शान्त होती है। आपने अपने जीवन में डोंगरे जी महाराज जैसी महान विभूति का आशीर्वाद पाया है, जिन्हें बड़े-बड़े महापुरूष लोग श्री शुकदेवजी का अवतार मानते है। आपको श्री स्वामीजी की परम श्रद्धेय रामसुखदासजी महाराज जैसे विरक्त परम भक्त, विद्वान और प्रभु के सन्निकट रहने वाले महापुरूष का आशीर्वाद, प्रेम, सानिध्य और सत्संग सुगमता से प्राप्त हुआ है।

संत-साधकों का सान्निध्य और आशीर्वाद - राजकुमारी जी पर कई संतों की विशेष कृपा रही है जिनके साथ सत्संग करने का अवसर मिला। उन संतों में परम पू. पंजाबी भगवान, पू. गोटीराम बाबा, पू. स्वामी श्री रामसुखदासजी महाराज, पू. उद्धव स्वामीजी, पू. रामकिंकरजी महाराज, पू. जिआर स्वामी, पू. डोंगरेजी महाराज, पू. अतुलकृष्णजी, पू. किशोरी रमणाचार्यजी, संत माता ब्रजदेवीजी, संत कृष्णा माँ, श्री श्रीजी बाबा, पं. श्रीनाथजी शास्त्री, पू. मुरारी बापू, स्वामी गोविंदानंदजी तीर्थ, पू. जनार्दनजी भट्ट, श्री दिवाकरजी द्विवेदी, पू. श्री सेवक शरणजी महाराज, पू. श्री चन्द्रप्रकाश भैयाजी, पू. श्री विद्याभानुजी महाराज, पू. गीतामनिषि श्री ज्ञानानंदजी महाराज, पू. श्री अखंडानंदगिरिजी महाराज, श्री ललिता चरणजी, भक्तिमति ऊषा दीदी, पू. रामदेव बाबा, पू. पांडुरंगजी आठवाले, पू. हितदासजी महाराज, पू. कूटस्थानंदजी महाराज, पू. श्री रमेश भाई ओझा, श्री श्रीकांतजी शर्मा, श्री भूपेन्द्र भाई पंड्या संग आदि आत्मानुभूति का अवसर प्राप्त हुआ है।

ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी के विवाह - पूज्य स्वामीजी महाराज के सान्निध्य में ठाकुर श्री जुगलबिहारी जी को अपना मानस पुत्र मानकर 11 फरवरी 1984 को भव्य उत्सव के साथ वैवाहिक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन आपके जीवन का सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि रही है। 1985 से ठाकुर श्री जुगलबिहारी की मंगलसेवा अलग पद्धति से शुरू की, जो आज तक अनवरत जारी है। वर्ष 2008-2009 में बड़े ही धूम-धाम से इस वैवाहिक आयोजन का रजत जयंती वर्ष “महामहोत्सव” के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ अनेकानेक विद्वत संतो के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर 108 कलषाभिषेक तथा जश्न-ए-बहारा महफिल का भी आयोजन किया गया।

सत्संग का आयोजन - बचपन से ही आप पू. स्वामी जी महाराज के सत्संग में लगी हुई थी। स्वामी जी महाराज के सत्संग का श्रवण और सदचर्चा का रस और अधिक लोगों को लाभान्वित करे इस उद्देश्य से आपने 1986 में ट्रीक (Tension Relief Informal Club) की स्थापना की। उनके द्वारा प्राप्त ज्ञान राशि का आपने वितरण करना शुरू किया। जिसके तहत प्रत्येक बुधवार को सत्संग का आयोजन होता आ रहा है। मनुष्य के जीवन में जितना सत्संग आयेगा उससे उसका सुधार होगा और तनाव से मुक्ति पा सकेगा।

कैंलेण्डर का प्रकाशन कार्य - ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी के विवाह के पाश्चात् आपके यहाँ उनसे संबंधित अनेकानेक उत्सवों एवं सत्संग आदि का आयोजन वृहद रूप में होने लगा। ठाकुरजी श्री जुगलबिहारी के प्रति लोगों की जागती आस्था को देखते हुए आपने ट्रीक नाम को वर्ष 2002 में “श्री जुगलबिहारी परिकर” के रूप में किया। हलांकि 1989 से ही आपने श्री जुगलबिहारी को केन्द्र बिन्दु में स्थापित कर भिन्न-भिन्न कलाकृतियों, सूत्रावली एवं पंचांग से सुसज्जित कैंलेण्डर का प्रकाशन कार्य प्रारंभ किया जो कि अब भी अनवरत जारी है।

विशाल पुस्तकालय की स्थापना - उनकी ज्ञान पिपासा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने आवास पर एक विशाल पुस्तकालय की स्थापना की है, जिसमें धर्म, आध्यात्म, संस्कृत और दर्शनशास्त्र के एक से बढ़कर एक दुर्लभ ग्रंथ है, जिनमें से कई तो आज लगभग अप्राप्य हैं। भक्तिमति के साथ आप एक सफल कवयित्रि भी हैं। स्वरचित काव्य संकलन ‘प्रेम की प्यास’ का प्रकाशन कार्य के साथ पूज्य डोंगरे महाराज की कथा पर आधारित श्रीमद्भागवत कथा समारिका का प्रकाशन कार्य, पूज्य मुरारी बापू के प्रवचनों पर आधारित 11 पुस्तकों का संकलन, संपादन तथा प्रकाशन किया है।

विविध धार्मिक आयोजन - आपके परिवार द्वारा समय-समय पर अनेकानेक धार्मिक आयोजन होते ही रहते है। इन आयोजनों में 1981 से 1985 तक प्रसंगानुसार रामायण के पारायण का नित्य नयी झाँकी के साथ भव्य आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिदिन हजारो श्रद्धालु भक्तजन एक साथ सामूहिक रूप से प्रसंगानुसार रामायण का पाठ करते। वर्ष 1982 में पूज्य डोंगरेजी महाराज के सान्निध्य में हिन्दी में प्रथम बार अष्टोतरशत श्रीमद्भागवत् परायण ज्ञानयज्ञ का विशाल आयोजन क्रॉस मैदान, मुम्बई में किया गया। गोवंश रक्षणार्थ बॉम्बे गोग्रास भिक्षा संस्था मातहत 1990 में पूज्य श्री मुरारी बापू की श्रीराम कथा का आयोजन क्रॉस मैदान, मुम्बई में करवाया गया। पूज्य श्री पंजाबी भगवान के सान्निध्य में 1993 में चित्रकुट में पूज्य श्री मुरारी बापू की तेरह दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन हुआ। वर्ष 2010 से गीता जयंती पर परम पू. स्वामीजी माहाराज के प्रवचनों पर आधारित आपके मार्मिक प्रवचनों का शुभारंभ हुआ, जो आज भी अनवरत जारी है। धनुर्मास उत्सव (दिसम्बर-जनवरी), ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी की वैवाहिक वर्षगांठ (11 फरवरी), होली उत्सव (मार्च), फूल मंगला उत्सव (मई), वन-विहार (जून), झूला उत्सव (जुलाई), जन्माष्टमी एवं नंदोत्सव (अगस्त), श्री राधा अष्टमी उत्सव (सितम्बर), अन्नकूट (नवंबर), हनुमान जयंती, शरद उत्सव, गुरू पूर्णिमा आदि अनेकानेक धार्मिक उत्सवों का आयोजन आपके द्वारा संपूर्ण वर्ष भर होता रहता है।

विविध सामाजिक आयोजन - राजकुमारी जी नारी उत्थान के लिए विशेष तौर पर जुटी हुई हैं। इनके लिए वर्कशॉप के माध्यम से वे महिलाओं को संबोधित करती है। “गृहस्थ में स्त्री की भूमिका”, “संयुक्त परिवार में प्रसन्नता” और “नारी शक्ति” जैसे विषयों को उठाकर बाई जी ने महिलाओं को जगाने और उनमें नई शक्ति का संचार करने का बीड़ा उठाया है। राजकुमारी जी मानती हैं कि एक व्यक्ति को शिक्षित करने से केवल एक व्यक्तित्व का निर्माण हो सकता है, लेकिन एक महिला को शिक्षित करने से एक संस्कारी परिवार का निर्माण सम्भव है। वर्ष 2010 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित परिसंवाद “लव, जिहाद एवं नारी शक्ति” में अपने प्रभावशाली वक्तव्य द्वारा उन्होंने कई लोगों को अपना मुरीद बनाया। इसी तरह सेल्स टैक्स ऑफिस मुम्बई में आयोजित हुए दो दिन के वर्कशॉप में मानवीय आदर्शों से जुड़े चार विषयों पर विस्तार से वक्तव्य दिया, इस दौरान कमिश्नर, डेप्यूटि कमिश्नर और विशिष्ट गणमान्य उपस्थित थे।

अन्नक्षेत्र का संचालन - संतो की प्रेरणा से भारत वर्ष के कई क्षेत्रों में आपके परिवार द्वारा अन्नक्षेत्र का संचालन हो रहा है। गोकुलधाम, नरसापुर (कर्जत) में श्री गोपाल वृद्धाश्रम का निर्माण कार्य हुआ है। गो-सेवा के कार्य में भी आप तन-मन-धन से अपना सहयोग दे रही है। कारगिल में शहीद नौ परिवारों के परिवारों को आपने उदार मन से सहयोग किया है।

विविध धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं से जुड़ाव - विविध धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं जैसे - विश्व हिन्दु परिषद, श्रीहरि सत्संग समिति, परोपकार, परमार्थ सेवा समिति, इस्कॉन मंदिर (मुम्बई एवं वृंदावन) से भी आप जुड़े हुए है। इन संस्थाओं के माध्यम से भी आप अनेकानेक धार्मिक व सामाजिक कार्यों में सहयोग कर रही है। इन उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित समाचार पत्र नवभारत टाइम्स द्वारा “उड़ान अवार्ड 2013” से आपको सम्मानित किया है।


श्रीमती राजकुमारी धूत के बारे में पारिवार के सदस्यों के विचार

रामनिवास जी धूत (पति) – राजू, मेरी धर्मपत्नी, मेरी हमसफर ने धार्मिक और सामाजिक जगत में अपनी एक जगह बनाई है। जीवन के प्रत्येक सोपान पर एक सच्चे हमसफर की भांति मेरी सहभागिनी रही है। यह बहुत ही सरल, कोमल ह्रदय वाली परम विदुषी एवं ठाकुर श्री जुगलबिहारी जी का सच्ची आराधक है। मेरे जीवन के कठिन समय मेरी सहधर्मिणी ने कदम से कदम मिलाते हुए मेरे साथ चलती रहीं। पारमार्थिक एवं संत कृपा के माध्यम से उसने नारी जगत में कई पारिवारिक समस्याओं को अपने ज्ञान और विवेक से सुलझाया है। यह हमारे परिवार के रीढ़ की हड्डी है। मुझे इसे जीवन संगिनी के रूप में पाकर अपार खुशी मिली।

अजय राधिका धूत (पुत्र) – ‘माँ के आँचल में, वात्सल्य है, ममता है, करुणा है, दया है, चिंता है, चिकित्सा है. माँ शिक्षक है, भिक्षुक है (संतान के लिए सुख मांगती है), माँ क मुस्कान है, आंसू में झलकता प्यार है, माँ इस संसार का सार है, और जिंदगी में आगे बढ़ने का पहला सबसे पहला प्यार है। माफी का पहला अक्षर है मां, मंदिर, मस्जिद, मक्का, मदीना का पहला अक्षर है मां। ईश्वर का जागता प्रमाण है माँ, संसार में सबसे पहली और आखिरी जरूरत है माँ। माँ-बाप, संतान की सबसे बड़ी संपति है, उनके आशीर्वाद और संस्कार से टलती हर विपत्ति है।’

आदित्य स्मिता धूत (पुत्र) - ‘बच्चे का पहला शब्द होता है माँ। बच्चे की पहली अध्यापिका होती है माँ। माँ ही बताती है एक बच्चे को कि उसका पिता कौन है। मेरी माँ से कई बार इस बात पर चर्चा हुई कि व्यक्ति पहले मानता है कि जानता है। मैं पहले सोचता था कि वह पहले जानता है, फिर मानता है। लेकिन सही मायने में तो वह चीज को पहले मानता है, फिर जानता है। मेरे लिए माँ एक प्रेरणास्रोत है। जैसे शिवाजी के लिए जीजा माता थी। अगर जीजा माता न होती तो शिवाजी, शिवाजी नहीं बनते। इसलिए माँ तू है तो हम हैं, वरना हम कुछ भी नहीं, कुछ भी नही। माँ तुझे सलाम।’

राधिका अजय धूत (पुत्रवधू) – ‘मेरी माँ, आपने हमें पारिवारिक जगत में सक्षम बनाया एवं धर्म की राहों पर चलना सिखाया। हमें समाज और धर्म का ज्ञान, रोजमर्रें की जिंदगी में आई उलझनों को सुलझाने एवं जीवन जीने की कला सिखाई। धन्य हैं हम आपको माँ के रूप में पाकर, हमें आप पर गर्व है।’
स्मिता आदित्य धूत (पुत्रवधू) - ‘मां ने ही हमें संस्कारों की दीक्षा दी, हमें एकजुट होकर रहना सिखाया, हमें जिंदगी जीने की कला सिखाई।’

श्रीप्रिया अग्रवाल (पौत्री) – ‘दादी मेरे लिए मेरी माँ के समान है। माँ बहुमुखी प्रतिभा के धनी है, उनमें असीम क्षमताएँ हैं। अध्यात्म के क्षेत्र में वे विशेष रूची रखती है, लिडरशिप क्वॉलिटी उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। उन्होंने मुझमें इन सभी गुणों के बीज अंकुरित किए हैं, जो कि आज मेरी जिंदगी में मददगार साबित हुए हैं।’

प्रियांजली धूत (पौत्री) – ‘माँ की माँ होना अपने आप में ही बड़ी निशानी है, शायद इसलिए हम उन्हें ‘ग्रैंड मदर’ कहते है। वो हमारी टीचर हैं, जिन्होंने जरूरत पड़ने पर डांटकर समझाया भी है, तो प्यार से उन गलतियों को सुधारने के लिए समझाया है। वो हमारी दोस्त भी है जिससे मैं जिंदगी की हर एक बात बड़ी आसानी से शेयर कर सकती हूं। मुझे उन पर गर्व है।’

कृपा धूत (पौत्री) – ‘आप मेरी प्रेरणास्रोत हैं, आप ने मेरा हाथ पकड़कर हमेशा मुझे सही राह दिखई है। आप मेरे लिए घने जंगल में रोशनी की किरणों के समान है।

महिमा धूत (पौत्री) – ‘माँ की लीडरशिप क्वॉलिटी, बेमिसाल मैनेजमेंट के गुणों और उनकी ताकत, प्यार और दुलार के गुणों के कारण वे हमेशा मेरे लिए सही प्रेरणास्रोत रही है। वे मेरी रोल मॉडल हैं, मेरी आडयल है।’

यदुराज धूत (पौत्र) – ‘मेरी दादी हम सब का अच्छे से ख्याल रखती है और बहुत ही स्वीट है। वो मुझे हर रात सोने से पहले भगवान कृष्ण की कहानी और उनकी बहादुरी के किस्से सुनाती हैं। माँ को उनके गुणों के कारण कई सम्मान मिले है, लव यू माँ।’



श्रीमती राजकुमारी जी धूत के आध्यात्मिक यात्रा के विविध कार्यक्रम …

1972 अर्चा विग्रह श्रीकृष्ण का आगमण।
1976 पू. डोंगरेजी महाराज की श्रीमद-भागवत् कथा (वृंदावन)।
1977 से पू. स्वामी श्री रामसुखदासजी का सत्संग प्रवचन (मुम्बई एवं वृन्दावन)।
1977 से 1985 वृहदाकार स्वरूप सामुहिक रामायण पाठ, नित नवीन चित्ताकर्षण झांकियाँ सहित। प्रतिदिन 150 मूर्तियों के साथ रिमोट द्वारा स्वचालित झाँकियों का निर्माण कार्य। ऐसा उत्सव जो अनुभव करने योग्य।
1979 श्री राधा कृपा मण्डल एवं मानव सेवा संघ के साथ जुड़ाव।
1981 से 1985 प्रसंगानुसार रामायण के पारायण का नित्य नयी झाँकी के साथ भव्य आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिदिन हजारो श्रद्धालु भक्तजन एक साथ सामूहिक रूप से प्रसंगानुसार रामायण का पाठ करते।
1982 पूज्य डोंगरेजी महाराज के सान्निध्य में हिन्दी में प्रथम बार अष्टोतरशत श्रीमद्भागवत् परायण ज्ञानयज्ञ का विशाल आयोजन क्रॉस मैदान, मुम्बई में किया गया।
1984 पूज्य स्वामीजी महाराज के सान्निध्य में ठाकुर श्री जुगलबिहारी जी को अपना मानस पुत्र मानकर 11 फरवरी 1984 को भव्य उत्सव के साथ वैवाहिक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन आपके जीवन का सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि रही है। ऐसा आयोजन न पहले कभी हुआ था और न ही भविष्य में होने की संभावना ही है।
1985 श्री जुगलबिहारीजी की मंगल सेवा अलग पद्धति से शुरू की गयी, जो आज तक अनवरत जारी है।
1985 पू. स्वामी श्री रामसुखदासजी महाराज के सान्निध्य में श्री नानी बाई के मायेरे का संगीतमय आयोजन।
1986 पू. गोटीराम बाबा के सान्ध्यि में पू. किशोरी रमणाजी की 108 भागवत कथा का पंढ़रपुर में आयोजन।
1986 ट्रिक (tension relief informal club) की स्थापना। ठाकुरजी श्री जुगलबिहारी के प्रति लोगों की जागती आस्था को देखते हुए आपने ट्रीक नाम को वर्ष 2002 में “श्री जुगलबिहारी परिकर” के रूप में किया।
1988 पू. स्वामी श्री रामसुखदासजी महाराज का सत्संग प्रवचन, राजस्थान में।
1989 से 2014 श्री जुगलबिहारीजी पर आधारित भिन्न-भिन्न कलाकृतियों, सुत्रावली एवं पंचाग से सुसज्जित कैलेण्डर का प्रकाशन कार्य।
1990 गोवंश रक्षणार्थ बॉम्बे गोग्रास भिक्षा संस्था मातहत पूज्य श्री मुरारी बापू की श्रीराम कथा का आयोजन क्रॉस मैदान, मुम्बई में करवाया गया।
1993 पूज्य श्री पंजाबी भगवान के सान्निध्य में चित्रकुट में पूज्य श्री मुरारी बापू की तेरह दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन हुआ।
1995 पू. संत श्री मुरारी बापू की सान्निधि में श्री महारूद्र यज्ञ, महुआ में।
1997 पू. संत श्री मुरारी बापू की सान्निधि में श्री महासोम यज्ञ (महुआ) एवं अनेक यज्ञ अनुष्ठान कार्य वर्ष ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी का पूज्य बापू के गृहनगर महुआ आगमण एवं तरह-तरह के उत्सवों का आयोजन।
2002 ब्रज चौरासी कोस यात्रा।
2004 महान श्री राधा अष्टमी कार्यक्रम, मुम्बई।
2004 पूज्य श्री दिवाकरजी महाराज के प्रवचन का भव्य आयोजन।
2006 से 2014 नानी बाई के मायेरे का संगीतमय प्रस्तुतिकरण, मुम्बई।
2007 श्रीमद्भावत महापुराण कथा का स्वयं पारायण, मुम्बई।
2007 श्री राधा रानी साँझी मानसरोवर रासलीला, वृन्दावन।
2008 से 2009 श्री जुगलबिहारी वैवाहिक रजत जयंती वर्ष - बड़े ही धूम-धाम से इस वैवाहिक आयोजन का रजत जयंती वर्ष “महामहोत्सव” के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ अनेकानेक विद्वत संतो के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर 108 कलषाभिषेक तथा जश्न-ए-बहारा महफिल का भी आयोजन किया गया।
2011 आय.एम.पी. सिलवासा में ठाकुर श्री रमणबिहारीजी के मंदिर का निर्माण कार्य एवं उनकी भाव प्रतिष्ठा।
2011 से 2014 गीता जयंती पर परम पू. स्वामीजी माहाराज के प्रवचनों पर आधारित आपके मार्मिक प्रवचनों का शुभारंभ हुआ, जो आज भी अनवरत जारी है।

Biography

Basic Info…
Name: Smt. Rajkumari Ji Dhoot
Born: 23 July 1944
Education: Graduate
Profession:

Family Member Info…
Husband: Shri Ramniwas Ji Dhoot

Father in Law: Late Ramdayal Ji Dhoot
Mother in Law: Late Chunibai Ji Dhoot

Father: Late Shrikrishna Somani
Mother: Late Smt. Laxmi Devi Somani

Sons & Daughters in Law:
Shri Ajay Dhoot - Smt. Radhika Dhoot
Shri Aditya Dhoot - Smt. Smita Dhoot

Grand Children:
• Sripriya Adit Agrwal
• Priyanjli Dhoot
• Kripa Dhoot
• Mahima Dhoot
• Yaduraj Dhoot

Organization …
• I.M.P. Powers Ltd. (Mumbai & Silvasa)
• Manglam Group Of Co. (Mumbai & Vapi)

Related Society & Trust …
President :
• Shri Jugalbihari Parikar, Mumbai
• Shri Jugalbihari Nikunjbihari Trust, Vrindavan

Trustee :
• Shri Radha Krishna Charitable Trust
• Shri Venktesh Seva Trust, Mumbai

Member
• Vishwa Hindu Parishad
• Shri Hari Satsang Samiti, Mumbai
• Paropkar, Mumbai
• Parmarth Seva Samiti, Mumbai
• ISKCON Temple, Mumbai & Vrindavan

Get In Contact
Mumbai Address :
Shriniketan, 2nd Floor, 86-A, Marine Drive, Mumbai - 400002
Tel: +91 - (022) 22817643/22818740

Vrindavan Address :
Shrikripanikuj, Hanumanbag, Raman Reti Road, Vrindavn (U.P.)
Tel: +91 - (056) 22442153

 

ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी



श्रीमती राजकुमारी जी धूत के विविध संतों से सत्संग …

• पू. पंजाबी भगवान
• पू. गोटीराम बाबा
• पू. स्वामी श्री रामसुखदासजी महाराज
• पू. उद्धव स्वामीजी
• पू. रामकिंकरजी महाराज
• पू. जिआर स्वामी
• पू. डोंगरेजी महाराज
• पू. अतुलकृष्णजी
• पू. किशोरी रमणाचार्यजी
• संत माता ब्रजदेवीजी
• संत कृष्णा माँ
• श्री श्रीजी बाबा
• पं. श्रीनाथजी शास्त्री
• पू. मुरारी बापू
• स्वामी गोविंदानंदजी तीर्थ
• पू. जनार्दनजी भट्ट
• श्री दिवाकरजी द्विवेदी
• पू. श्री सेवक शरणजी महाराज
• पू. श्री चन्द्रप्रकाश भैयाजी
• पू. श्री विद्याभानुजी महाराज
• पू. गीतामनिषि श्री ज्ञानानंदजी महाराज
• पू. श्री अखंडानंदगिरिजी महाराज
• श्री ललिता चरणजी
• भक्तिमति ऊषा दीदी
• पू. रामदेव बाबा
• पू. पांडुरंगजी आठवाले
• पू. हितदासजी महाराज
• पू. कूटस्थानंदजी महाराज
• पू. श्री रमेश भाई ओझा
• श्री श्रीकांतजी शर्मा
• श्री भूपेन्द्र भाई पंड्या

सामाजिक योगदान …

• भागवत गीता पर पांच सौ से ज्यादा प्रवचन
• जुगल बिहारी परिवार के माध्यम से महिलाओँ को संबोधन
• मैनेजमेंट गीता पर समय-समय विभिन्न संस्थानों में वक्तव्य
• नारी उत्थान के लिए विशेष कार्य

साहित्यिक क्रियाकलाप …

• श्रीनिकेतन (मुम्बई निवास) में पुस्तकालय की स्थापना
• पूज्य डोंगरे महाराज की कथा पर आधारित श्रीमद्भागवत कथा समारिका का प्रकाशन कार्य
• पूज्य मुरारी बापू के प्रवचनों पर आधारित 11 पुस्तकों का संकलन, संपादन तथा प्रकाशन
• स्वरचित काव्य संकलन ‘प्रेम की प्यास’ का प्रकाशन कार्य

वर्कशॉप …

• गृहस्थ जीवन में स्त्री की भूमिका – माहेश्वरी भवन, मुम्बई
• संयुक्त परिवार में प्रसन्नता – गर्ल्स कॉलेज, पुणे
• नारी शक्ति – महिला विश्वविद्यालय, वाराणसी
• The Binding women - गर्ल्स होस्टल, दिल्ली
• Personality Development - मलाड़, मुम्बई
• Value for Moral Value - सेल्स टैक्स भवन
• Management by Bhagwat Gita - वृंदावन कॉलेज

वर्ष प्रर्यन्त उत्सव आयोजन …

• धनुमास उत्सव - श्री गोदंबाजी के 30 प्राशूर पर विशेष प्रवचन (दिसंबर एवं जनवरी)
• ठाकुर श्री जुगलबिहारीजी की वैवाहिक वर्षगाँठ उत्सव (11 फरवरी)
• होली उत्सव (मार्च)
• फूल बंगला उत्सव (मई)
• वन विहार (जून)
• झूला उत्सव (जुलाई)
• जन्माष्टमी एवं नंदोत्सव (अगस्त)
• श्री राधाअष्टमी उत्सव (सितंबर)
• अन्नकूट (नवंबर)
• हनुमान जयंती, शरद उत्सव, गुरू पुर्णिमा आदि अनेकानेक उत्सवों का आयोजन संपूर्ण वर्ष होता है।


Smt. Rajkumari Dhoot

With Shri Ramniwas Ji Dhoot

With "NBT Udan-2013" Award



श्रीमती राजकुमारी जी धूत के जीवन के कुछ अनमोल यादगार पल की चित्रित झलकियाँ