Vijay Dixit

Mr. Vijay Dixit (Rajesh Transports)

देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई सदैव से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। देश का हर प्रतिभावान युवा अपने सपने साकार करने मुम्बई आता है, और अपने मेहनत, लगन से व्यवसायिकता के शीर्ष पर सफलता का झंड़ा गाड़ देता है। इससे न सिर्फ उस व्यक्ति के परिवार का नाम रोशन होता है, बल्कि उससे उसका समाज, गाँव, शहर व देश भी गौरवांवित होता है। ऐसे ही एक संघर्षशील युवा सुदूर राजस्थान के रामगढ़ शेखावाटी, जिला – चुरू से चलकर मुम्बई आया और 1922 में दीक्षित ट्रांसपोर्ट की नींव रखी। उस समय मुम्बई में लोकल ट्रांसपोर्ट के नाम पर सिर्फ कुछ एक बैलगाड़ियां हुआ करती थी। महज दो बैलगाड़ियों के साथ लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय की शुरूआत कर कई ऐतिहासिक राजनैतिक, सामाजिक व व्यवसायिक उपलब्धियों व घटनाचक्र का गवाह रहा इस दीक्षित ट्रांसपोर्ट के आधार स्तंभ में से एक हैं श्री विजय दीक्षित।

श्री विजय दीक्षित का जन्म 1953 में हुआ। पिताजी स्व. श्री सांवरमल जी दीक्षित के बुलावे पर माताजी श्रीमती सुप्रभा जी दीक्षित एक वर्ष की आयु में ही इन्हें लेकर 1954 में मुम्बई चली आई। यहीं पर इनका लालन-पालन व शिक्षा-दीक्षा संम्पन्न हुई। बचपन से ही इन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेल तथा संगीत में विशेष रूची रहीं है। खेलों में जहाँ कुश्ती, लंगड़ी आदि में की प्राथमिकता रहीं वही संगीत में बांसुरी, शहनाई के धुन विशेष रूप से सुनते थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में ही मारवाड़ी कमर्शियल हाई स्कूल, मुम्बई में पढ़ाई करते हुए अपने पैतृक ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में भी रूची लेने लगे। एक वर्ष पाश्चात् 15 वर्ष की आयु में गाड़ी चलाना भी सीख लिया और पुरी तरह से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ गये।

दीक्षित ट्रांसपोर्ट की शुरूआत 1922 में आपके परदादा जी स्व. श्री रामचंद्र जी दीक्षित ने किया था। उस समय मुम्बई में लोकल ट्रांसपोर्ट के नाम पर माल ढ़ोने के सिर्फ कुछ बैलगाड़ियाँ हुआ करती है, जो ताँबाकांटा तालाब के चारों ओर खड़ी रहा करती थी। इन बैलगाड़ियों के माध्यम से बाड़ी बंदर, कोणार्क बंदर व गोदी आदि जगहों पर माल पहुंचाने का कार्य किया जाता था। दो बैलगाड़ियों से शुरूआत किया गया दीक्षित ट्रांसपोर्ट मुम्बई में किसी भी राजस्थानी द्वारा शुरू किया गया पहला ट्रांसपोर्ट व्यवसाय था। कुछ ही समय में यह उन दिनों के लगभग सभी बड़े कपड़ा व्यपारियों का सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कम्पनी बन गया। 1932 में आपके दादाजी स्व. श्री सुरजमल जी दीक्षित इस व्यवसाय से जुड़े और उन्होंने फोर्ट की सेवलेट ट्रक खरीदकर मुम्बई लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को एक नई गति प्रदान कर दिया। मुम्बई के लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय का यह पहला ट्रक था। एक-एक कर इस कम्पनी के पास अपने चार ट्रक हो गये। लोकल ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ मुम्बई शहर में आयोजित होनेवाले विभिन्न सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में भी इन गाड़ियों का सदुपयोग होने लगा।

1942 की ऐतिहासिक मुम्बई कांग्रेस अधिवेशन का गवाह भी दीक्षित ट्रांसपोर्ट बना। नाना चौक से लेकर आजाद मैदान, मुम्बई तक रोड़ शो के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, पं. जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के तात्कालीन शीर्ष नेताओं के चरण कमल इन वाहनों पर पड़ते ही दीक्षित ट्रांसपोर्ट धन्य हो उठा। उस ऐतिहासिक पल की चर्चा करते ही विजय दीक्षित के चेहरा खिल उठता है और वे अपने आप को गौरवांविंत महसुस करते है। दादा जी की बातें बतलाते हुए कहते हैं कि उस समय पेट्रोल 25 पैसे लीटर मिलता था। उस पूरे अधिवेशन के लिए कांग्रेस पार्टी की ओर से उनकी कम्पनी को 3 रूपये भाड़ा के तौर पर उपहार मिला था। 1950 में आपके पिताजी स्व. श्री सांवरमल जी दीक्षित भी इस व्यवसाय से जुड़ गये। वे चुरू जिला के नामी पहलवान के साथ-साथ गाड़ी के मैकेनिकल जानकार भी थे। इन्होंने भी इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया। इस व्यावसाय से चौथी पीढ़ी के रूप में विजय दीक्षित का आगमन हुआ। समयानुसार आपके दोनों भाई विनोद और राजेश भी आपके काम में हाथ बंटाने लगे। पारिवारिक ट्रांसपोर्ट व्यावसाय उँच्चाईयों की ओर अग्रसर हो ही रहा था, कि इसी बीच बँटवारा की स्थिति उत्पन्न हो गयी। आपके चाचाजी श्री बनवारीलाल जी एवं श्री चिरंजीलाल जी ने अपना हिस्सा लेकर अलग हो गये।

पारिवारिक बँटवारा के बाद 1979 में आपने दोनों भाईयों के साथ मिलकर राजेश ट्रांसपोर्ट के नाम से नये फर्म का गठन किया। इसी बीच 1970-80 के दशक में मुम्बई में कामगारों की हड़ताल तथा मिलों के पलायन का कपड़ा व्यापार पर गहरा असर पड़ा। कई बड़ी-बड़ी मिले बंद हो गयी, तो कई मुम्बई के बाहर चले गये। इसी कड़ी में मुम्बई के कई कपड़े के प्रोसेस हाउस मुम्बई से सटे थाणे जिले के डोम्बिवली तथा भिवंडी में भी शिफ्ट हो गये। व्यापारियों के सहुलियत के लिये आपने लोकल ट्रासपोर्ट व्यवसाय का मुम्बई से डोम्बिवली व भिवंड़ी तक विस्तार किया। प्रारंभ में आपका यहाँ मोनोपोली रहा। आपके दोनों लड़के सौरभ और सिद्धार्थ ने राजेश कार्गों के नाम से 2010 में मुम्बई से सुरत के लिए भी डेली ट्रांसपोर्ट की शुरूआत किया। वर्तमान में इस परिवार की सातवीं पीढ़ी के रूप में आपके पोता प्रणव का आगमन हो चुका है।

लगातार सात पीढ़ीयों से एक ही व्यवसाय को संभालने वाले इस गौरवशाली परिवार के मुखिया श्री विजय दीक्षित का मानना है कि सच्चाई, इमानदारी और लगन से कोई काम किया जाय तो सफलता अवश्य मिलता है। वर्तमान दौर में कई ट्रांसपोर्टर व व्यापारियों द्वारा उनका माल खोने की शिकायतें सुनने को मिलता है। लोगों में विश्वासनियता की कमी होती जा रही है, जो कि दुःखद है। पिछले लगभग सौ वर्षों में उनके कम्पनी द्वारा न तो किसी भी व्यापारी का माल खोया है और न ही उनका नुकसान होने दिया है। यही उनकी विशेष उपलब्धि है, जो उन्हें सबसे अलग करती है।


Biography

Basic Info…
Name : Mr. Vijay Dixit
Born : 27 May 1953
Education : 11th
Profession : Transport

Family Member Info…
Father : Late Shri Sawarmal Ji Dixit
Mother : Smt. Suprabha Ji Dixit

Wife : Smt. Pratibha Dixit

Sons & Daughters in Law:
Mr. Sourabh Dixit - Smt. Sonali Dixit
Mr. Sidharth Dixit - Smt. Parol Dixit

Daughter & Son in Law :
Smt. Nidhi - Ajay Joshi

Grand Children:
Pranav, Vaidehi, Subhakar, Dhananjay

Organization …
Dixit Transport
Rajesh Transport
Rajesh Cargo

Related Location…
Native: Ramgardh Shekhawati, Rajasthan
Education: Mumbai, Maharashtra
Work Area : Mumbai, Maharashtra

Get In Contact
Address : 162, Dr. Viegas Street, Chira Bazar, Mumbai - 400002

Tel : +91 - 022 - 22015242 / 22056984
Email:
Website :


श्री विजय दीक्षित के जीवन के कुछ अनमोल यादगार पल की चित्रित झलकियाँ